गुरुवार, 27 अप्रैल 2023

क्या है केजरीवाल के CM आवास के रिनोवेशन में हुए खर्च का सच

इसकी शुरुआत कुछ चैनलों द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री के 45 करोड़ रुपये के घर के रिनोवेशन के बारे में खबरें आने से हुई। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री या आप के बारे में कोई भी नकारात्मक खबर से इन मीडिया वालों को शानदार  टीआरपी मिलती है। और ये पूरी तरह से सिर्फ TRP और केजरीवाल की छवि को बिगाड़ने का ही खेल है।

मीडिया में खबर आने के कुछ ही मिनटों में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रचार चैनल सक्रिय हो गए। व्हाट्सएप के माध्यम से यह खबर फैलाई गई और राजनीतिक आउटलेट्स के अति उत्साही समर्थक और आईटी सेल के मजदूर सामग्री फैलाने में ओवर टाइम करते नज़र आये।


दिल्ली के मुख्यमंत्री को अपने घर के रिनोवेशन की आवश्यकता क्यों थी? क्या यह किसी प्रकार की शानो शौकत या शो ऑफ था? 


मीडिया इस बात की पूरी तस्वीर या जानकारी देने के इच्छुक नहीं थे और इसलिए इस आवश्यकता को समझना जरूरी है।

पीडब्ल्यूडी को मुख्यमंत्री आवास में छत गिरने से लेकर दीवार गिरने तक के बारे में कई शिकायतें मिलीं। एक स्ट्रक्चरल ऑडिट से पता चला कि संपत्ति पुरानी थी और अब उस संपत्ति में रहना जोखिम भरा है। यह 80 साल पुरानी इमारत थी और आसपास के कार्यालय क्षेत्रों और सचिवालयों को भी नुकसान पहुंचा था। पीडब्ल्यूडी के अनुसार, CM हाउस के उस 80 साल पुराने ढांचे को पूरे रिनोवेशन की जरूरत थी।

इस 80 साल पुराने CM आवास के ढांचे की हालत क्या थी, वो साल 2020 में छपी इस खबर को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है

https://www.hindustantimes.com/cities/structural-audit-for-kejriwal-s-official-house/story-f12tZd8ZyFsvQr2Kgi3WSK.html



CM आवास के सम्पूर्ण रिनोवेशन कार्य की स्वीकृति 


दिल्ली के पीडब्ल्यूडी ने सीएम के आवास और उनके कैबिनेट सहयोगियों के कार्यालयों के रिनोवेशन के लिए लगभग 35.99 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी, जो बिल्कुल एक जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे थे।

 इस तथ्य को चैनलों ने दबा दिया, जो एक बड़े क्षेत्र में होने वाले करोड़ों के काम को सीएम आवास के एक छोटे से क्षेत्र में दिखाने में लगे हुए थे।


पीडब्ल्यूडी के डिप्टी सेक्रेटरी (वर्क्स) अनिल भोला ने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है- "इंजीनियर-इन-चीफ पीडब्ल्यूडी के प्रस्ताव के अनुसरण में 35,99,44,400 रुपये की अनुमानित लागत से दिल्ली सचिवालय में सीएम और मंत्रियों के कार्यालयों के नवीनीकरण" , मुझे उपरोक्त कार्य के लिए प्रशासनिक स्वीकृति एवं व्यय स्वीकृति संप्रेषित करने के लिए निर्देश दिया गया है।

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36 करोड़ 45 करोड़ कैसे हो गए?

वर्ष 2021 एवं 2022 में निर्माण संबंधी अतिरिक्त कार्य अलग-अलग पत्रों के माध्यम से स्वीकृत किये गये। चलते निर्माण में छोटे छोटे बदलाव भी किये गए थे जिनमें एक अतिरिक्त मंजिल का निर्माण किया गया था और एक पूर्ण नवीनीकरण किया गया था।

 हम सभी जानते हैं कि सचिवालय (कैबिनेट सचिवालय) CM हाउस का ही भाग है। 45 करोड़ का वर्तमान आंकड़ा CM निवास और सचिवालय (सचिवालय) में किए गए अन्य सभी कार्यों का योग है।


क्या यह 45 करोड़ की लागत फिजूल खर्च है ?

यह समझने के लिए कि हम सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को एक मानक मान कर कैलकुलेशन करते हैं।

सेंट्रल विस्टा लगभग 98,000 वर्ग मीटर में फैली 20,000 करोड़ की परियोजना है। प्रति वर्गमीटर लागत लगभग 0.2 करोड़ प्रति वर्गमीटर है वंही दिल्ली सचिवालय और अरविंद केजरीवाल का आवास लगभग 5000 वर्ग मीटर है, जो लगभग 45 करोड़ में बना है। लागत 0.01 प्रति वर्ग मीटर आती है सेंट्रल विस्टा पर खर्च दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास में पीडब्ल्यूडी द्वारा खर्च किए गए खर्च से 20 गुना अधिक है।

 उस मानक के अनुसार, मीडिया को सेंट्रल विस्टा खर्च के बारे में  बावला होना चाहिए, पर क्या उन्होंने किया??

देखा जाए तो दोनों प्रोजेक्ट कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुए लेकिन मीडिया के लिए केवल दिल्ली सरकार का काम ही गलत था बाकी सेंट्रल विस्ता में तो कोई दिक्कत उनको कभी नहीं हुई।


आखिर केजरीवाल आवास को लेकर देश की मीडिया के विलाप के पीछे की सच्चाई क्या है?


मीडिया के कुछ हिस्सों के अपने निजी स्वार्थ हैं और उस कारण ये मीडिया हाउस केजरीवाल के खिलाफ बार बार कई अर्धसत्य चलाने के लिए जाने जाते हैं।

इस मीडिया ने फिजूल खर्च और शानोशौकत के एक तरफा आरोप लगाए हैं, लेकिन उन्हें सत्यापित नहीं किया जा सकता है क्योंकि कहानी प्रथम दृष्टया आधे-अधूरे सच के इर्द-गिर्द घूमती है जो इनके इरादे पर जवाब से ज्यादा सवाल खड़े करती है।

1 टिप्पणी:

  1. आंकड़ों के साथ बेहतर तरीके से समझाया गया है। आपको साधुवाद।🙏

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